विदेशी साहित्य / अनुवाद - लघुकथा



लघुकथा : प्रतिक्रिया

अभी वह ऑफिस में बैठा ही था की चपरासी रिसीवर उसकी तरफ बढ़ाता हुआ बोला-सर चीफ साहब का फ़ोन है
टेलीफोन पर पिघले हुए उसने कहा-नमस्ते सर, मैं वर्मा बोल रहा हूँ
नमस्ते, तुम अपनी रिपोर्ट भिजवाते क्यों नही, आज फिर एक रिमाइंडर आया है, तुम्हे प्रमोशन नही चाहिए क्या,
"नहीं सर, ऐसी बात नही है, हमने तो परसो ही फॉर्म भर कर आपके पास भिजवा दिया था, आपके डाक में पड़ी होगी सर`
अच्छा ठीक है, मै अभी दिखवा लेता हूँ, और सुनो, क्या बात है तुमने चरण दास का पेमेंट क्यों रोकवा दिया है,
"सर, वह तो बिलकुल बेकार आदमी है, अपना तो जायेगा ही, हम सभी को ले डूबेगा"
"क्या हुआ"
सर, उसने सीमेंट की ज़गह ख़ाली बालू ही भेज दिया है, एक बरसात भी दीवार सह नही पायेगी, इसीलिए उसके ख़िलाफ़ आपके पास रिपोर्ट भेज रहा हूँ
'भाई, वह अपना आदमी है, मंत्री जी का साला है, जरा एक बार फिर से तुम खुद देख लो, उन बोरियो में सीमेंट ही होगी, और सुनो, शाम को लौटते समय इधर से हमसे मिलकर अपना गोपनीय रिपोर्ट भी देखते जाना ।"


राजेन्द्र परदेशी

नब साहित्य डट ओआरजी

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लघुकथा : प्रतिक्रिया - 2017-10-18

अभी वह ऑफिस में बैठा ही था की चपरासी रिसीवर उसकी तरफ बढ़ाता हुआ बोला-सर चीफ साहब का फ़ोन है
टेलीफोन पर पिघले हुए उसने कहा-नमस्ते सर, मैं वर्मा बोल रहा हूँ
नमस्ते, तुम अपनी रिपोर्ट भिजवाते क्यों नही, आज फिर एक रिमाइंडर आया है, तुम्हे प्रमोशन नही चाहिए क्या,
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